पनघटवा डैम: जल संसाधन, पर्यावरण और क्षेत्रीय अध्ययन का महत्वपूर्ण उदाहरण

पनघटवा डैम: जल संसाधन, पर्यावरण और क्षेत्रीय अध्ययन का महत्वपूर्ण उदाहरण

 

डंडई एवं धुरकी सीमांत क्षेत्र में प्रकृति की गोद में स्थित पनघटवा डैम गढ़वा जिले के प्रमुख स्थलों में से एक है, जिसका महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भौगोलिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी स्थल है। यह डैम गढ़वा जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम दिशा में अवस्थित है। चारों ओर फैले जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक जलस्रोत इस क्षेत्र को अध्ययन के लिए आदर्श बनाते हैं।

भौगोलिक दृष्टिकोण से पनघटवा डैम एक महत्वपूर्ण जल संरचना है। डैम की गहराई अधिक होने के कारण इसमें वर्ष भर जल संग्रह बना रहता है, जो जल संसाधन प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था के अध्ययन के लिए उपयोगी उदाहरण प्रस्तुत करता है। डैम से विभिन्न प्रखंड क्षेत्रों में जल आपूर्ति की जाती है, जिसके लिए एक आकर्षक जल टंकी का निर्माण किया गया है, जबकि एक अन्य टंकी निर्माणाधीन है। यह संरचना विद्यार्थियों को जल वितरण प्रणाली और ग्रामीण जल प्रबंधन को समझने में सहायक है।

पर्यावरणीय अध्ययन के संदर्भ में पनघटवा डैम का क्षेत्र अत्यंत समृद्ध है। घने जंगल, पहाड़ी भू-आकृति और जैव विविधता इस स्थान को पारिस्थितिकी तंत्र के अध्ययन हेतु उपयुक्त बनाते हैं। विद्यार्थी यहां वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग और मानव-पर्यावरण संबंधों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकते हैं। प्रकृति की मनोरम वादियां यह स्पष्ट करती हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किस प्रकार मानव जीवन के लिए आवश्यक है।

सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पनघटवा डैम एक उपयोगी अध्ययन स्थल है। मध्य दिसंबर से जनवरी के अंतिम सप्ताह तक यहां बड़ी संख्या में लोग पिकनिक एवं भ्रमण के लिए आते हैं, विशेषकर नववर्ष के अवसर पर। गढ़वा जिले के साथ-साथ छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और बिहार से भी लोग यहां पहुंचते हैं। इससे क्षेत्रीय पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संपर्क को समझने का अवसर मिलता है। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थी यह अध्ययन कर सकते हैं कि पर्यटन किसी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करता है।

आवागमन की दृष्टि से भी पनघटवा डैम का अध्ययन महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ से आने वाले लोग सनावल मार्ग से कनहर नदी पार कर सीधे डैम तक पहुंचते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लोग बंशीधर नगर और धुरकी होते हुए यहां आते हैं। गढ़वा जिला मुख्यालय से मेराल-डंडई मार्ग के माध्यम से डैम तक पहुंचा जाता है। यह मार्ग नेटवर्क क्षेत्रीय संपर्क और ग्रामीण विकास के अध्ययन के लिए उपयोगी उदाहरण प्रस्तुत करता है।

इस प्रकार पनघटवा डैम एक ऐसा स्थल है, जहां पर्यटन के साथ-साथ शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन, भूगोल, जल संसाधन प्रबंधन और सामाजिक अध्ययन को एक साथ समझा जा सकता है। शैक्षणिक वेबसाइट के लिए यह विषय विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री प्रदान करता है।

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