अध्याय 1 : हमारे आसपास के पदार्थ
हम अपने दैनिक जीवन में अनेक प्रकार की वस्तुओं का उपयोग करते हैं। घर, विद्यालय, खेत, सड़क तथा प्राकृतिक वातावरण में जो भी वस्तुएँ दिखाई देती हैं, वे किसी-न-किसी पदार्थ से बनी होती हैं। हवा, पानी, मिट्टी, लकड़ी, लोहा, प्लास्टिक, काँच, कागज, दूध और पत्थर जैसी वस्तुएँ हमारे जीवन का महत्वपूर्ण भाग हैं।
प्रत्येक पदार्थ के कुछ विशेष गुण होते हैं, जैसे रंग, आकार, गंध, कठोरता, घुलनशीलता तथा भार। इन्हीं गुणों के आधार पर हम एक पदार्थ को दूसरे से अलग पहचानते हैं। विज्ञान में पदार्थों का अध्ययन इसलिए आवश्यक है क्योंकि इन्हीं से हमारे चारों ओर का सम्पूर्ण भौतिक संसार निर्मित है।
पदार्थ
जिस वस्तु का अपना द्रव्यमान होता है तथा जो स्थान घेरती है, उसे पदार्थ कहते हैं। सरल रूप में - द्रव्यमान + स्थान घेरना = पदार्थ
पदार्थ के उदाहरण — वायु, जल, मिट्टी, लकड़ी, लोहा, पत्थर, काँच, कागज, तेल, प्लास्टिक, दूध, रबर
इन सभी वस्तुओं का द्रव्यमान होता है और ये कुछ-न-कुछ स्थान घेरती हैं, इसलिए ये पदार्थ हैं।
प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण
भारतीय दार्शनिकों ने बहुत पहले यह विचार प्रस्तुत किया था कि प्रकृति पाँच मूल तत्वों से बनी है। इन्हें पंचमहाभूत कहा जाता है।
ये पाँच तत्व हैं— पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश
यह विचार प्राकृतिक घटनाओं को समझने का प्रारम्भिक प्रयास था।
आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आधुनिक विज्ञान के अनुसार प्रत्येक पदार्थ अत्यन्त सूक्ष्म कणों से बना होता है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि सामान्य आँखों से दिखाई नहीं देते। विशेष उपकरणों की सहायता से इनके अस्तित्व का अध्ययन किया जाता है। इन्हीं सूक्ष्म कणों की व्यवस्था और व्यवहार के कारण पदार्थों के विभिन्न गुण दिखाई देते हैं।
पदार्थ की कणिकीय प्रकृति
सभी पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बने होते हैं। प्रत्येक पदार्थ में उपस्थित कणों का आकार, दूरी तथा आकर्षण बल अलग-अलग हो सकता है। इसी कारण अलग-अलग पदार्थों के गुण भी भिन्न होते हैं।
पदार्थ के कणों की प्रमुख विशेषताएँ
1. पदार्थ के कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं
पदार्थ के कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें नंगी आँखों से नहीं देखा जा सकता। उदाहरण — एक बूंद रंग पूरे गिलास के पानी का रंग बदल देती है। इससे पता चलता है कि रंग के कण बहुत छोटे होते हैं।
2. पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है
किसी भी पदार्थ के कण पूरी तरह आपस में जुड़े नहीं रहते। उनके बीच थोड़ी-बहुत खाली जगह रहती है। इसी कारण एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों के बीच प्रवेश कर सकते हैं। उदाहरण— पानी में नमक घुलना, पानी में चीनी घुलना, मिट्टी में पानी समा जाना।
3. पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील रहते हैं
पदार्थ के कण लगातार गति करते रहते हैं। तापमान बढ़ने पर उनकी गति भी बढ़ जाती है। उदाहरण — इत्र की खुशबू पूरे कमरे में फैल जाती है, अगरबत्ती की सुगंध दूर तक पहुँच जाती है, चाय में डाली गई चीनी कुछ समय बाद अपने आप मिल जाती है।
4. पदार्थ के कणों में आकर्षण बल होता है
प्रत्येक पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इसी आकर्षण के कारण पदार्थ अपना स्वरूप बनाए रखते हैं। आकर्षण बल सभी पदार्थों में समान नहीं होता। क्रम इस प्रकार है—ठोस में सबसे अधिक, द्रव में मध्यम, गैस में सबसे कम
दैनिक जीवन से उदाहरण
• ईंट कठोर होती है क्योंकि उसके कण बहुत मजबूती से जुड़े रहते हैं।• पानी बहता है क्योंकि उसके कण अपेक्षाकृत स्वतंत्र होते हैं।
• हवा आसानी से फैल जाती है क्योंकि उसके कणों के बीच अधिक दूरी होती है।
विसरण
हमने जाना कि पदार्थ के कण निरंतर गति करते रहते हैं। इसी गति के कारण एक पदार्थ के कण दूसरे पदार्थ के कणों में स्वयं फैल जाते हैं। इस प्रक्रिया को विसरण कहते हैं। विसरण गैसों में सबसे अधिक, द्रवों में उससे कम तथा ठोसों में सबसे कम होता है, क्योंकि गैसों के कण सबसे अधिक स्वतंत्र होते हैं।
दैनिक जीवन के उदाहरण
• कमरे में इत्र छिड़कते ही उसकी सुगंध कुछ समय बाद पूरे कमरे में फैल जाती है।• अगरबत्ती जलाने पर उसकी खुशबू दूर तक पहुँच जाती है।
• पानी में स्याही की एक बूंद डालने पर कुछ समय बाद पूरा पानी रंगीन हो जाता है।
• रसोई में बन रहे भोजन की सुगंध दूसरे कमरे तक पहुँच जाती है।
पदार्थ की अवस्थाएँ
सामान्य परिस्थितियों में पदार्थ मुख्यतः तीन अवस्थाओं में पाए जाते हैं—ठोस, द्रव तथा गैस
इन तीनों अवस्थाओं में कणों की व्यवस्था, दूरी, गति तथा आकर्षण बल अलग-अलग होता है।
ठोस
जिस पदार्थ का निश्चित आकार तथा निश्चित आयतन होता है, उसे ठोस कहते हैं। ठोस में कण बहुत पास-पास होते हैं तथा उनके बीच आकर्षण बल अधिक होता है। उदाहरण — पत्थर, लकड़ी, लोहा, ईंट, बर्फ, काँच
ठोस के प्रमुख गुण
• निश्चित आकार होता है।• निश्चित आयतन होता है।
• कण बहुत निकट रहते हैं।
• आकर्षण बल सबसे अधिक होता है।
• आसानी से दबाए नहीं जा सकते।
• कण केवल अपने स्थान पर कंपन करते हैं।
द्रव
जिस पदार्थ का आयतन निश्चित होता है, लेकिन आकार निश्चित नहीं होता, उसे द्रव कहते हैं। द्रव जिस पात्र में रखा जाता है, उसी का आकार ग्रहण कर लेता है । उदाहरण— जल, दूध, तेल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल
द्रव के प्रमुख गुण
• निश्चित आयतन होता है।• आकार बदल सकता है।
• बह सकता है।
• कणों के बीच मध्यम दूरी होती है।
• कण एक-दूसरे पर आसानी से फिसलते हैं।
• बहुत कम मात्रा में संपीडित किया जा सकता है।
गैस
जिस पदार्थ का न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित आयतन, उसे गैस कहते हैं। गैस उपलब्ध पूरे स्थान में फैल जाती है। उदाहरण— ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प
गैस के प्रमुख गुण
• निश्चित आकार नहीं होता।• निश्चित आयतन नहीं होता।
• पात्र का पूरा स्थान भर देती है।
• कणों के बीच बहुत अधिक दूरी होती है।
• आकर्षण बल सबसे कम होता है।
• आसानी से संपीडित की जा सकती है।
• विसरण सबसे तेज होता है।
ठोस, द्रव और गैस में अंतर
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकार | निश्चित | पात्र के अनुसार | निश्चित नहीं |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | निश्चित नहीं |
| आकर्षण बल | सबसे अधिक | मध्यम | सबसे कम |
| कणों की दूरी | बहुत कम | मध्यम | बहुत अधिक |
| संपीडन | लगभग नहीं | बहुत कम | आसानी से |
पदार्थ की अवस्था में परिवर्तन
पदार्थ केवल एक ही अवस्था में नहीं रहता। उपयुक्त परिस्थितियों में वह अपनी अवस्था बदल सकता है। सामान्यतः तापमान और दाब में परिवर्तन होने पर पदार्थ के कणों की ऊर्जा बदलती है, जिससे पदार्थ ठोस से द्रव, द्रव से गैस अथवा इसके विपरीत अवस्था में परिवर्तित हो सकता है।
उदाहरण के लिए, बर्फ को गर्म करने पर वह पानी में बदल जाती है तथा पानी को और अधिक गर्म करने पर वह जलवाष्प बन जाता है। इसी प्रकार जलवाष्प को ठंडा करने पर वह पुनः पानी और फिर बर्फ में बदल सकती है।
तापमान का प्रभाव
जब किसी पदार्थ को ऊष्मा दी जाती है, तो उसके कण ऊर्जा ग्रहण करते हैं। इससे उनकी गति बढ़ जाती है। कणों के बीच की दूरी बढ़ने लगती है और आकर्षण बल कम होने लगता है। परिणामस्वरूप पदार्थ अपनी अवस्था बदल सकता है।
इसके विपरीत, किसी पदार्थ को ठंडा करने पर उसके कणों की गति कम हो जाती है। वे एक-दूसरे के अधिक निकट आ जाते हैं और पदार्थ पुनः द्रव या ठोस अवस्था में बदल सकता है।
गलन
जब कोई ठोस पदार्थ ऊष्मा प्राप्त करके द्रव में परिवर्तित होता है, तो इस प्रक्रिया को गलन कहते हैं। उदाहरण— बर्फ का पानी बनना, मोम का पिघलना, घी का गर्म करने पर द्रव बन जाना।
गलनांक
जिस निश्चित तापमान पर कोई ठोस पदार्थ द्रव में बदलना प्रारम्भ करता है, उसे उसका गलनांक कहते हैं। उदाहरण — शुद्ध बर्फ का गलनांक 0°C (273 K) होता है।
गुप्त ऊष्मा
अवस्था परिवर्तन के समय पदार्थ ऊष्मा ग्रहण या उत्सर्जित करता है, लेकिन उसका तापमान नहीं बदलता। इस ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
गुप्त ऊष्मा दो प्रकार की होती है—1. गलन की गुप्त ऊष्मा, 2. वाष्पन की गुप्त ऊष्मा
क्वथन
जब किसी द्रव को गर्म करने पर वह एक निश्चित तापमान पर तीव्र गति से गैस में बदलने लगता है, तो इस प्रक्रिया को क्वथन कहते हैं। क्वथन पूरे द्रव में होता है और इसमें बुलबुले बनते हैं।
क्वथनांक
जिस निश्चित तापमान पर कोई द्रव गैस में बदलना प्रारम्भ करता है, उसे उसका क्वथनांक कहते हैं। उदाहरण — शुद्ध जल का क्वथनांक 100°C (373 K) होता है।
वाष्पीकरण
किसी द्रव का उसके क्वथनांक से कम तापमान पर केवल उसकी सतह से धीरे-धीरे गैस में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है। यह एक सतही प्रक्रिया है।
दैनिक जीवन के उदाहरण
• गीले कपड़ों का सूखना।• पसीने का सूखना।
• खुले बर्तन में पानी का धीरे-धीरे कम होना।
• इत्र का उड़ जाना।
क्वथन और वाष्पीकरण में अंतर
| क्वथन | वाष्पीकरण |
|---|---|
| निश्चित तापमान पर होता है। | किसी भी तापमान पर हो सकता है। |
| पूरे द्रव में होता है। | केवल सतह पर होता है। |
| बुलबुले बनते हैं। | बुलबुले नहीं बनते। |
| प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज होती है। | प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी होती है। |
दाब का पदार्थ की अवस्था पर प्रभाव
केवल तापमान ही नहीं, बल्कि दाब में परिवर्तन होने पर भी पदार्थ की अवस्था बदल सकती है। जब किसी गैस पर अधिक दाब लगाया जाता है और उसका तापमान कम किया जाता है, तो गैस के कण एक-दूसरे के निकट आ जाते हैं। इससे गैस द्रव में परिवर्तित हो सकती है। इसी सिद्धांत के आधार पर अनेक गैसों को द्रवित करके छोटे सिलेंडरों में सुरक्षित रखा जाता है। उदाहरण — एलपीजी (LPG) सिलेंडर, ऑक्सीजन सिलेंडर, कार्बन डाइऑक्साइड अग्निशामक
केल्विन तापमान मापनी
वैज्ञानिक प्रयोगों में तापमान मापने के लिए केल्विन (K) मापनी का उपयोग किया जाता है।
सेल्सियस और केल्विन के बीच संबंध—
केल्विन (K) = सेल्सियस (°C) + 273
उदाहरण— 0°C = 273 K, 25°C = 298 K, 37°C = 310 K, 100°C = 373 K
वाष्पीकरण को प्रभावित करने वाले कारक
वाष्पीकरण की गति सभी परिस्थितियों में समान नहीं होती। यह कई कारकों पर निर्भर करती है।
1. सतह का क्षेत्रफल
यदि द्रव का सतही क्षेत्रफल अधिक होगा, तो अधिक कण वायु के संपर्क में आएँगे और वाष्पीकरण तेजी से होगा। उदाहरण — कपड़ों को फैलाकर सुखाने पर वे जल्दी सूख जाते हैं।
2. तापमान
तापमान बढ़ने पर कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप अधिक कण वाष्प बनकर बाहर निकल जाते हैं। उदाहरण— धूप में कपड़े छाया की अपेक्षा जल्दी सूखते हैं।
3. वायु की गति
तेज़ हवा चलने पर वाष्पित कण वातावरण में जल्दी दूर चले जाते हैं, जिससे नए कण आसानी से वाष्पित होते रहते हैं। उदाहरण— पंखे के नीचे रखे कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।
4. आर्द्रता
वायु में पहले से उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं। यदि आर्द्रता अधिक हो, तो वाष्पीकरण धीमा हो जाता है क्योंकि हवा में जलवाष्प के लिए स्थान कम बचता है। उदाहरण— बरसात के मौसम में कपड़े देर से सूखते हैं।
वाष्पीकरण से शीतलता क्यों होती है?
जब कोई द्रव वाष्प में बदलता है, तो उसे ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा वह अपने आसपास से प्राप्त करता है। इससे आसपास का तापमान कम हो जाता है और शीतलता का अनुभव होता है।
दैनिक जीवन में इसके उदाहरण
1. पसीना आने पर ठंडक क्यों लगती है?
शरीर से निकलने वाला पसीना वाष्पीकृत होने के लिए शरीर से ऊष्मा लेता है। इससे शरीर ठंडा हो जाता है।
2. मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा क्यों रहता है?
घड़े की दीवारों के सूक्ष्म छिद्रों से थोड़ा-सा पानी बाहर आकर वाष्पीकृत होता रहता है। इस प्रक्रिया में ऊष्मा का उपयोग होता है, जिससे घड़े का पानी ठंडा रहता है।
3. एसीटोन लगाने पर ठंडक क्यों महसूस होती है?
एसीटोन बहुत तेजी से वाष्पीकृत होता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊर्जा वह त्वचा से लेता है, जिससे ठंडक महसूस होती है।
4. गर्मियों में सूती कपड़े पहनना क्यों लाभदायक है?
सूती कपड़े पसीने को अच्छी तरह सोख लेते हैं। इससे पसीना जल्दी वाष्पीकृत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है।
संघनन
जब किसी गैस या वाष्प का तापमान कम किया जाता है, तो उसके कणों की गतिज ऊर्जा घट जाती है। कण एक-दूसरे के निकट आने लगते हैं और गैस द्रव में बदल जाती है। इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं। संघनन, वाष्पीकरण की विपरीत प्रक्रिया है। संघनन के उदाहरण— ठंडे गिलास की बाहरी सतह पर पानी की बूँदें बनना, सुबह घास पर ओस की बूँदें दिखाई देना, बादलों से वर्षा होना, ठंडी बोतल पर पानी की बूंदें जम जाना।
उर्ध्वपातन
कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो गर्म करने पर द्रव अवस्था में आए बिना सीधे ठोस से गैस में बदल जाते हैं। इसी प्रकार ठंडा करने पर गैस से सीधे ठोस बन जाते हैं। इस प्रक्रिया को उर्ध्वपातन कहते हैं।
उर्ध्वपातन करने वाले पदार्थ
• कपूर, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड, नेफ्थलीन की गोलियाँदैनिक जीवन में उपयोग
1. कपूर का प्रयोग
पूजा-पाठ में प्रयुक्त कपूर बिना पिघले धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है। यह उर्ध्वपातन का उदाहरण है।
2. नेफ्थलीन की गोलियाँ
कपड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए रखी गई नेफ्थलीन की गोलियाँ धीरे-धीरे गैस में बदल जाती हैं।
3. वर्षा का निर्माण
सूर्य की ऊष्मा से जल वाष्प बनता है। यह ऊपर जाकर ठंडा होकर संघनित होता है और बादल बनाता है। बाद में वर्षा होती है।
दैनिक जीवन के महत्वपूर्ण प्रश्न
बर्फ वाला गिलास बाहर से गीला क्यों हो जाता है?
गिलास की ठंडी सतह के संपर्क में आने पर वायु की जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है।
गर्मियों में पसीना शरीर को ठंडा कैसे रखता है?
पसीना वाष्पीकृत होने के लिए शरीर से ऊष्मा ग्रहण करता है। इससे शरीर का तापमान कम हो जाता है।
एलपीजी गैस सिलेंडर में द्रव रूप में क्यों रखी जाती है?
दाब बढ़ाकर गैस को द्रव में बदला जाता है, जिससे कम स्थान में अधिक मात्रा में गैस संग्रहित की जा सके।
मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा क्यों रहता है?
घड़े की सतह से पानी धीरे-धीरे वाष्पीकृत होता रहता है। इस प्रक्रिया में ऊष्मा का उपयोग होता है, जिससे घड़े का पानी ठंडा रहता है।
पृष्ठ संख्या 4
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-से पदार्थ हैं— कुर्सी, वायु, स्नेह, गंध, घृणा, बादाम, विचार, शीत, नींबू पानी, इत्र की सुगंध?
उत्तर: जिस वस्तु का द्रव्यमान होता है तथा जो स्थान घेरती है, उसे पदार्थ कहते हैं। दिए गए विकल्पों में कुर्सी, वायु, बादाम, नींबू पानी तथा इत्र की सुगंध पदार्थ हैं, क्योंकि इनका द्रव्यमान होता है और ये स्थान घेरते हैं। जबकि स्नेह, गंध, घृणा, विचार तथा शीत पदार्थ नहीं हैं, क्योंकि इनका स्वयं का द्रव्यमान और निश्चित आयतन नहीं होता।
प्रश्न 2. गर्म-गरम खाने की गंध कई मीटर दूर से ही आपके पास पहुँच जाती है, लेकिन ठंडे खाने की महक लेने के लिए आपको उसके पास जाना पड़ता है। कारण बताएँ।
उत्तर: गर्म भोजन के कण अधिक ऊष्मा प्राप्त करने के कारण तेज़ गति से चलते हैं। इसलिए उसकी गंध के कण वायु में तेजी से फैल जाते हैं और दूर तक पहुँच जाते हैं। इसके विपरीत, ठंडे भोजन के कणों की गति कम होती है, इसलिए उसकी गंध धीरे-धीरे फैलती है। यही कारण है कि ठंडे भोजन की महक लेने के लिए उसके पास जाना पड़ता है।
प्रश्न 3. स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी को काटकर आगे बढ़ पाता है। इससे पदार्थ का कौन-सा गुण प्रेक्षित होता है? पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर: स्वीमिंग पूल में गोताखोर का पानी को काटकर आगे बढ़ पाना यह दर्शाता है कि पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है और द्रव के कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं। इसी कारण गोताखोर आसानी से पानी में आगे बढ़ पाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पदार्थ के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, उनके बीच रिक्त स्थान होता है, वे निरंतर गतिशील रहते हैं तथा उनके बीच परस्पर आकर्षण बल पाया जाता है।
प्रश्न 4. पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएँ होती हैं?
उत्तर: पदार्थ के कणों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
• पदार्थ के कण अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं।
• पदार्थ के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है।
• पदार्थ के कण निरन्तर गतिशील रहते हैं।
• पदार्थ के कणों के बीच परस्पर आकर्षण बल होता है।
पृष्ठ संख्या 6
1. किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैं। बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिखित को व्यवस्थित करें— वायु, चिमनी का धुआँ, शहद, जल, चॉक, रुई और लोहा।
उत्तर: घनत्व वह भौतिक राशि है जो किसी पदार्थ के द्रव्यमान और आयतन के अनुपात को दर्शाती है।
बढ़ते हुए घनत्व का क्रम है—
चिमनी का धुआँ < वायु < रुई < जल < शहद < चॉक < लोहा।
2. (a) पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों में होने वाले अंतर को सारणीबद्ध कीजिए।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकार | निश्चित | निश्चित नहीं | निश्चित नहीं |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | निश्चित नहीं |
| कणों के बीच दूरी | बहुत कम | मध्यम | बहुत अधिक |
| आकर्षण बल | सबसे अधिक | मध्यम | सबसे कम |
| संपीड्यता | लगभग नहीं | बहुत कम | बहुत अधिक |
| तरलता | नहीं | होती है | होती है |
| घनत्व | अधिक | ठोस से कम | सबसे कम |
2. (b) निम्नलिखित पर टिप्पणी कीजिए— दृढ़ता, संपीड्यता, तरलता, बर्तन में गैस का भरना, आकार, गतिज ऊर्जा एवं घनत्व।
उत्तर: दृढ़ता वह गुण है जिसके कारण ठोस पदार्थ अपना आकार बनाए रखते हैं और आसानी से टूटते या दबते नहीं हैं। संपीड्यता वह गुण है जिसके कारण किसी पदार्थ का आयतन दबाव डालने पर कम किया जा सकता है। यह गुण गैसों में सबसे अधिक पाया जाता है। तरलता वह गुण है जिसके कारण द्रव और गैस बह सकते हैं। बर्तन में गैस का भरना गैस के कणों के बीच अधिक रिक्त स्थान और उनकी निरंतर गति के कारण होता है, जिससे गैस पूरे बर्तन में फैल जाती है। आकार ठोस का निश्चित होता है, जबकि द्रव और गैस का निश्चित आकार नहीं होता। गतिज ऊर्जा पदार्थ के कणों की गति की ऊर्जा है, जो गैसों में सबसे अधिक और ठोस में सबसे कम होती है। घनत्व किसी पदार्थ के द्रव्यमान और आयतन का अनुपात होता है।
3. कारण बताइए—
(a) गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं।
उत्तर: गैस के कणों के बीच बहुत अधिक रिक्त स्थान होता है और वे निरंतर सभी दिशाओं में गति करते रहते हैं। इसलिए गैस पूरे बर्तन में फैलकर उसे पूरी तरह भर देती है।
(b) गैस बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती है।
उत्तर: गैस के कण लगातार गति करते हुए बर्तन की दीवारों से टकराते रहते हैं। इन टक्करों के कारण दीवारों पर दबाव पड़ता है।
(c) लकड़ी की मेज़ ठोस कहलाती है।
उत्तर: लकड़ी की मेज़ का आकार और आयतन निश्चित होता है। इसके कण आपस में बहुत मजबूती से जुड़े रहते हैं तथा इसे आसानी से दबाया नहीं जा सकता। इसलिए यह ठोस पदार्थ कहलाती है।
(d) हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं, लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा।
उत्तर: हवा के कणों के बीच बहुत अधिक रिक्त स्थान और आकर्षण बल बहुत कम होता है, इसलिए उसमें हाथ आसानी से चल जाता है। जबकि लकड़ी के कण बहुत पास-पास और मजबूत आकर्षण बल से जुड़े होते हैं। इसलिए लकड़ी में हाथ चलाने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
4. सामान्यतः ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है। लेकिन बर्फ़ का टुकड़ा जल में तैरता है। ऐसा क्यों होता है?
उत्तर: बर्फ जमने पर उसके कणों के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे उसका आयतन बढ़ जाता है और घनत्व कम हो जाता है। यही कारण है कि बर्फ का घनत्व जल से कम होता है। कम घनत्व होने के कारण बर्फ जल की सतह पर तैरती है।
पृष्ठ संख्या 9
1. निम्नलिखित तापमान को सेल्सियस (°C) में बदलें।
उत्तर: सेल्सियस तापमान ज्ञात करने का सूत्र है—
°C = K − 273
(a) 300 K = 300 − 273 = 27°C
(b) 573 K = 573 − 273 = 300°C
2. निम्नलिखित तापमान पर जल की भौतिक अवस्था क्या होगी?
(a) 250°C
उत्तर: 250°C पर जल अपने क्वथनांक (100°C) से अधिक तापमान पर होता है, इसलिए वह जलवाष्प (गैस) की अवस्था में रहेगा।
(b) 100°C
उत्तर: 100°C पर जल अपने क्वथनांक पर होता है। इस तापमान पर जल और जलवाष्प दोनों अवस्थाएँ एक साथ उपस्थित हो सकती हैं।
3. किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों रहता है?
उत्तर: अवस्था परिवर्तन के समय पदार्थ द्वारा प्राप्त या उत्सर्जित ऊष्मा उसके तापमान को बढ़ाने या घटाने के बजाय उसकी अवस्था बदलने में प्रयुक्त होती है। इस ऊष्मा को गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहते हैं। इसलिए अवस्था परिवर्तन के दौरान पदार्थ का तापमान स्थिर रहता है।
4. वायुमंडलीय गैसों को द्रव में परिवर्तन करने के लिए कोई विधि सुझाइए।
उत्तर: वायुमंडलीय गैसों को द्रव में बदलने के लिए उन पर उच्च दाब लगाया जाता है और उनका तापमान कम किया जाता है। अधिक दाब और कम तापमान के कारण गैस के कण एक-दूसरे के निकट आ जाते हैं और गैस द्रव में परिवर्तित हो जाती है।
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1. गर्म, शुष्क दिन में कूलर अधिक ठंडा क्यों करता है?
उत्तर: गर्म और शुष्क दिनों में वायु में आर्द्रता कम होती है, जिससे कूलर के पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है। वाष्पीकरण के दौरान पानी आसपास से ऊष्मा ग्रहण करता है, जिससे हवा अधिक ठंडी हो जाती है। इसलिए गर्म, शुष्क दिन में कूलर अधिक ठंडा करता है।
2. गर्मियों में घड़े का जल ठंडा क्यों होता है?
उत्तर: मिट्टी के घड़े की दीवारों में सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनसे थोड़ा-सा पानी बाहर आकर वाष्पीकृत हो जाता है। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा पानी और घड़े से प्राप्त होती है, जिससे घड़े का पानी ठंडा हो जाता है।
3. एसीटोन, पेट्रोल या इत्र डालने पर हमारी हथेली ठंडी क्यों हो जाती है?
उत्तर: एसीटोन, पेट्रोल और इत्र बहुत जल्दी वाष्पीकृत हो जाते हैं। वाष्पीकरण के लिए आवश्यक ऊष्मा ये हमारी हथेली से ग्रहण करते हैं। इससे हथेली का तापमान कम हो जाता है और ठंडक महसूस होती है।
4. कप की अपेक्षा प्लेट से हम गर्म दूध या चाय जल्दी क्यों पी लेते हैं?
उत्तर: प्लेट में चाय या दूध अधिक सतह क्षेत्र में फैल जाता है, जिससे उसका वाष्पीकरण और ऊष्मा का ह्रास तेजी से होता है। इसलिए प्लेट में रखा गर्म दूध या चाय जल्दी ठंडा हो जाता है और हम उसे जल्दी पी लेते हैं।
5. गर्मियों में हमें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर: गर्मियों में हमें हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने चाहिए। सूती कपड़े पसीने को अच्छी तरह सोख लेते हैं और उसे जल्दी वाष्पीकृत होने में सहायता करते हैं। इससे शरीर की ऊष्मा कम होती है और ठंडक का अनुभव होता है। हल्के रंग के कपड़े सूर्य की ऊष्मा कम अवशोषित करते हैं, इसलिए वे अधिक आरामदायक होते हैं।
अभ्यास
1. निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस (°C) इकाई में परिवर्तित करें।
उत्तर: सेल्सियस = केल्विन − 273
(a) 300 K = 27°C
(b) 573 K = 300°C
2. निम्नलिखित तापमानों को केल्विन (K) इकाई में परिवर्तित करें।
उत्तर: केल्विन = सेल्सियस + 273
(a) 25°C = 298 K
(b) 373°C = 646 K
3. निम्नलिखित अवलोकनों हेतु कारण लिखें।
उत्तर: (a) नैफ्थलीन को रखा रहने देने पर यह समय के साथ बिना कोई ठोस पदार्थ छोड़े अदृश्य हो जाती है।
नैफ्थलीन उर्ध्वपातन का गुण प्रदर्शित करती है। यह ठोस अवस्था से सीधे गैस में बदल जाती है, इसलिए कुछ समय बाद बिना कोई ठोस अवशेष छोड़े अदृश्य हो जाती है।
(b) हमें इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए भी पहुँच जाती है।
उत्तर: इत्र के कण वायु में तेजी से विसरित (Diffusion) हो जाते हैं। इसी कारण उसकी गंध दूर बैठे व्यक्ति तक भी पहुँच जाती है।
4. निम्नलिखित पदार्थों को उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण के अनुसार व्यवस्थित करें।
उत्तर: ऑक्सीजन < जल < चीनी
(गैस में आकर्षण सबसे कम, द्रव में मध्यम और ठोस में सबसे अधिक होता है।)
5. निम्नलिखित तापमानों पर जल की भौतिक अवस्था क्या है?
(a) 25°C — द्रव
(b) 0°C — ठोस (बर्फ) तथा द्रव (जल) दोनों
(c) 100°C — द्रव (जल) तथा गैस (जलवाष्प) दोनों
6. पुष्टि हेतु कारण दें।
(a) जल कमरे के ताप पर द्रव है।
उत्तर: कमरे का तापमान जल के गलनांक (0°C) और क्वथनांक (100°C) के बीच होता है। इसलिए जल कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में रहता है।
(b) लोहे की अलमारी कमरे के ताप पर ठोस है।
उत्तर: लोहे का गलनांक बहुत अधिक होता है। कमरे का तापमान उसके गलनांक से काफी कम होता है, इसलिए लोहा ठोस अवस्था में रहता है।
7. 273 K पर बर्फ को ठंडा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठंडा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है?
उत्तर: 273 K (0°C) पर बर्फ पिघलने के लिए अतिरिक्त गुप्त ऊष्मा ग्रहण करती है, जबकि उसी तापमान का जल गुप्त ऊष्मा ग्रहण नहीं करता। इसलिए बर्फ अधिक ऊष्मा अवशोषित करती है और अधिक शीतलता प्रदान करती है।
8. उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है?
उत्तर: भाप से जलने की तीव्रता अधिक होती है, क्योंकि भाप में गुप्त ऊष्मा भी होती है। त्वचा के संपर्क में आने पर भाप संघनित होकर यह अतिरिक्त ऊष्मा भी छोड़ती है, जिससे अधिक जलन होती है।
9. निम्नलिखित चित्र के लिए A, B, C, D, E तथा F की अवस्था परिवर्तन को नामांकित करें।

• A – गलन
• B – वाष्पीकरण / क्वथन
• C – संघनन
• D – जमना / ठोसकरण
• E – उर्ध्वपातन
• F – निक्षेपण / प्रतिउर्ध्वपातन