झारखण्ड की प्रमुख नदियाँ
झारखण्ड की भौगोलिक संरचना मुख्यतः छोटानागपुर पठार पर आधारित है, जो प्राचीन आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से निर्मित है। राज्य का अधिकांश भाग ऊँचा-नीचा, पथरीला तथा वनाच्छादित है। यही कारण है कि यहाँ की नदियाँ तीव्र ढाल के साथ प्रवाहित होती हैं और अनेक स्थानों पर जलप्रपातों का निर्माण करती हैं। राज्य की अधिकांश नदियाँ वर्षा पर निर्भर हैं, अतः वर्षा ऋतु में इनमें जल की प्रचुरता तथा ग्रीष्म ऋतु में जल की न्यूनता देखी जाती है। औसत वार्षिक वर्षा लगभग एक सौ बीस से एक सौ पचास सेंटीमीटर के मध्य होती है, जो नदी प्रणाली को पोषित करती है। झारखण्ड की नदियों को दो प्रमुख अपवाह तंत्रों में विभाजित किया जाता है—गंगा अपवाह तंत्र तथा बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित अपवाह तंत्र। नीचे प्रत्येक प्रमुख नदी का क्रमबद्ध, पुस्तक-शैली में विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
झारखण्ड के सभी प्रमुख जलप्रपात, झीलें एवं विशिष्ट जलस्रोत | स्थान, ऊँचाई, नदी और विशेषताएँ
दामोदर नदी
दामोदर नदी झारखण्ड की सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदियों में से एक है। इसका उद्गम छोटानागपुर पठार के पलामू क्षेत्र के निकट माना जाता है। यह नदी प्रारम्भ में पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई हजारीबाग, गिरिडीह, बोकारो तथा धनबाद जिलों से गुजरती है। आगे चलकर यह पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है और अंततः हुगली नदी में मिल जाती है।
दामोदर नदी का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। वर्षा ऋतु में इसमें प्रचंड बाढ़ आती थी, जिससे बंगाल क्षेत्र में व्यापक क्षति होती थी। इसी कारण इसे “बंगाल का शोक” कहा गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस नदी पर बहुउद्देशीय परियोजनाएँ आरम्भ की गईं। तिलैया, मैथन, पंचेत तथा कोनार बाँधों का निर्माण कर बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई तथा विद्युत उत्पादन की व्यवस्था की गई।
दामोदर की प्रमुख सहायक नदियों में बराकर, कोनार, बोकारो तथा जमुनिया का उल्लेख किया जाता है। दामोदर घाटी क्षेत्र कोयला भंडारों के कारण औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। बोकारो तथा धनबाद जैसे औद्योगिक नगर इसी नदी घाटी के कारण विकसित हुए हैं।
बराकर नदी
बराकर नदी दामोदर की एक प्रमुख सहायक नदी है। इसका उद्गम हजारीबाग पठार से होता है। यह गिरिडीह तथा धनबाद जिलों से प्रवाहित होकर पश्चिम बंगाल में दामोदर नदी में मिल जाती है।
बराकर नदी पर निर्मित मैथन बाँध जलविद्युत उत्पादन तथा बाढ़ नियंत्रण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस नदी की घाटी खनिज संपदा से युक्त है और यह क्षेत्र की कृषि तथा उद्योग दोनों को जल उपलब्ध कराती है।
कोनार नदी
कोनार नदी दामोदर की सहायक नदी है, जिसका उद्गम हजारीबाग क्षेत्र से होता है। इस पर निर्मित कोनार बाँध जल संचयन एवं सिंचाई के लिए उपयोगी है। कोनार नदी की घाटी में कृषि योग्य भूमि पाई जाती है और स्थानीय ग्रामीण जीवन इस नदी पर निर्भर है।
बोकारो नदी
बोकारो नदी दामोदर की एक अन्य सहायक नदी है। यह बोकारो क्षेत्र में प्रवाहित होती है और स्थानीय इस्पात उद्योग तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों को जल उपलब्ध कराती है। इसके तटवर्ती क्षेत्र में नगरीकरण का विकास हुआ है।
उत्तरी कोयल नदी
उत्तरी कोयल नदी का उद्गम राँची पठार से होता है। यह पलामू क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती हुई बिहार राज्य में प्रवेश करती है और सोन नदी से मिल जाती है, जो आगे चलकर गंगा में समाहित होती है।
उत्तरी कोयल नदी वनाच्छादित क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इसके जल का उपयोग सिंचाई तथा पेयजल आपूर्ति में किया जाता है। इस नदी पर सिंचाई परियोजनाओं का विकास किया गया है, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई है।
अजय नदी
अजय नदी का उद्गम संथाल परगना क्षेत्र की पहाड़ियों से होता है। यह देवघर एवं जामताड़ा जिलों से प्रवाहित होकर पश्चिम बंगाल में भागीरथी नदी में मिल जाती है। यह गंगा अपवाह तंत्र की सहायक नदी है।
अजय नदी के तटवर्ती क्षेत्र में कृषि कार्य प्रमुख रूप से किया जाता है। इसकी सहायक नदियों में सकरी नदी का उल्लेख किया जाता है। वर्षा ऋतु में इसका प्रवाह तीव्र हो जाता है।
मायूराक्षी नदी
मायूराक्षी नदी का उद्गम देवघर जिले की त्रिकूट पहाड़ियों से होता है। यह पश्चिम बंगाल में प्रवाहित होती है। इस नदी पर निर्मित मसंजोर बाँध सिंचाई तथा जल संचयन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मायूराक्षी नदी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सहारा प्रदान करती है।
पुनपुन नदी
पुनपुन नदी छोटानागपुर के उत्तरी भाग से निकलती है और बिहार में गंगा नदी में मिल जाती है। यह गंगा अपवाह तंत्र का अंग है। पुनपुन नदी का जल कृषि के लिए उपयोगी है और यह वर्षा पर निर्भर रहती है।
फल्गु नदी
फल्गु नदी का संबंध छोटानागपुर पठार से है। गया क्षेत्र में यह निरंजना तथा मोहाना नदियों के संगम से निर्मित होती है। धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है। झारखण्ड के उत्तरी भाग में इसकी सहायक धाराएँ प्रवाहित होती हैं।
स्वर्णरेखा नदी
स्वर्णरेखा नदी का उद्गम राँची जिले के नागड़ी क्षेत्र से होता है। यह राँची एवं पूर्वी सिंहभूम जिलों से होकर ओडिशा और पश्चिम बंगाल में प्रवाहित होती है तथा सीधे बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
इसकी प्रमुख सहायक नदियों में कांची, खरकई तथा राढ़ू सम्मिलित हैं। स्वर्णरेखा नदी औद्योगिक नगर जमशेदपुर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि इसकी बालू में स्वर्ण कण पाए जाते थे, जिससे इसका नाम स्वर्णरेखा पड़ा।
दक्षिणी कोयल नदी
दक्षिणी कोयल नदी का उद्गम राँची पठार से होता है। यह पश्चिम सिंहभूम से प्रवाहित होती हुई शंख नदी से मिलती है। दोनों नदियों के संगम से ब्राह्मणी नदी का निर्माण होता है, जो आगे ओडिशा में समुद्र की ओर प्रवाहित होती है।
दक्षिणी कोयल नदी जनजातीय क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा के समान है और कृषि कार्यों में सहायक है।
शंख नदी
शंख नदी का उद्गम छत्तीसगढ़ के पठारी भाग से माना जाता है। यह झारखण्ड में प्रवेश कर दक्षिणी कोयल से मिलती है। वनाच्छादित क्षेत्रों से होकर प्रवाहित होने के कारण इसका प्राकृतिक सौंदर्य विशेष उल्लेखनीय है।
कांची नदी
कांची नदी स्वर्णरेखा की सहायक नदी है। इसका उद्गम राँची क्षेत्र से होता है। इस नदी पर स्थित प्रसिद्ध जलप्रपात क्षेत्र की प्राकृतिक शोभा को बढ़ाता है।
खरकई नदी
खरकई नदी पश्चिम सिंहभूम से निकलकर जमशेदपुर में स्वर्णरेखा नदी से मिलती है। औद्योगिक जल आपूर्ति की दृष्टि से इसका महत्व अत्यधिक है।
राढ़ू नदी
राढ़ू नदी स्वर्णरेखा की सहायक नदी है। यह राँची क्षेत्र में प्रवाहित होती है और एक प्रसिद्ध जलप्रपात का निर्माण करती है।
कारो नदी
कारो नदी दक्षिणी कोयल की सहायक नदी है। यह राँची तथा पश्चिम सिंहभूम क्षेत्र में प्रवाहित होती है। इस पर एक प्रमुख परियोजना प्रस्तावित रही है, जिसका उद्देश्य सिंचाई एवं ऊर्जा उत्पादन था।
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झारखण्ड की समस्त प्रमुख नदियों की सारणी
| क्रम | नदी का नाम | उद्गम स्थान | प्रवाह की दिशा | किन जिलों से प्रवाहित | किस नदी में मिलती है | नदी प्रणाली |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | दामोदर नदी | छोटानागपुर पठार | पूर्व | बोकारो, धनबाद | हुगली | गंगा प्रणाली |
| 2 | बराकर नदी | हजारीबाग पठार | पूर्व | गिरिडीह, धनबाद | दामोदर | गंगा प्रणाली |
| 3 | कोनार नदी | हजारीबाग | दक्षिण-पूर्व | बोकारो | दामोदर | गंगा प्रणाली |
| 4 | बोकारो नदी | राँची क्षेत्र | पूर्व | बोकारो | दामोदर | गंगा प्रणाली |
| 5 | उसरी नदी | गिरिडीह | दक्षिण | गिरिडीह | बराकर | गंगा प्रणाली |
| 6 | अजय नदी | संथाल परगना | पूर्व | देवघर, जामताड़ा | भागीरथी | गंगा प्रणाली |
| 7 | मायूराक्षी नदी | त्रिकूट पर्वत (देवघर) | दक्षिण-पूर्व | दुमका | भागीरथी | गंगा प्रणाली |
| 8 | बांसलोई नदी | साहिबगंज क्षेत्र | दक्षिण-पूर्व | साहिबगंज | गंगा | गंगा प्रणाली |
| 9 | गुमानी नदी | राजमहल पहाड़ियाँ | दक्षिण | साहिबगंज | गंगा | गंगा प्रणाली |
| 10 | ब्राह्मणी नदी | शंख व दक्षिण कोयल के संगम से | दक्षिण-पूर्व | सिमडेगा | बंगाल की खाड़ी | ब्राह्मणी प्रणाली |
| 11 | शंख नदी | छत्तीसगढ़ सीमा | दक्षिण-पूर्व | सिमडेगा | ब्राह्मणी | ब्राह्मणी प्रणाली |
| 12 | दक्षिण कोयल नदी | गुमला पठार | दक्षिण-पूर्व | गुमला, सिमडेगा | ब्राह्मणी | ब्राह्मणी प्रणाली |
| 13 | कारो नदी | राँची क्षेत्र | दक्षिण | पश्चिमी सिंहभूम | दक्षिण कोयल | ब्राह्मणी प्रणाली |
| 14 | स्वर्णरेखा नदी | राँची पठार (नगड़ी) | पूर्व | राँची, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम | बंगाल की खाड़ी | स्वतंत्र प्रणाली |
| 15 | खरकई नदी | सिंहभूम क्षेत्र | पूर्व | पूर्वी सिंहभूम | स्वर्णरेखा | स्वर्णरेखा प्रणाली |
| 16 | करकरी नदी | राँची | दक्षिण-पूर्व | सरायकेला | स्वर्णरेखा | स्वर्णरेखा प्रणाली |
| 17 | कांची नदी | राँची पठार | पूर्व | राँची | स्वर्णरेखा | स्वर्णरेखा प्रणाली |
| 18 | उत्तर कोयल नदी | नेतरहाट पठार | उत्तर-पूर्व | लातेहार, पलामू | सोन | गंगा प्रणाली |
| 19 | औरंगा नदी | पलामू | उत्तर | पलामू | उत्तर कोयल | गंगा प्रणाली |
| 20 | सोन नदी | अमरकंटक (मध्यप्रदेश) | उत्तर-पूर्व | पलामू सीमा | गंगा | गंगा प्रणाली |
| 21 | पंचाने नदी | हजारीबाग | दक्षिण | हजारीबाग | दामोदर | गंगा प्रणाली |
| 22 | चंदन नदी | देवघर | पूर्व | देवघर | गंगा | गंगा प्रणाली |
| 23 | पथरोल नदी | जामताड़ा | पूर्व | जामताड़ा | अजय | गंगा प्रणाली |
| 24 | तिलैया क्षेत्र की लघु नदियाँ | कोडरमा | दक्षिण | कोडरमा | बराकर | गंगा प्रणाली |
संक्षिप्त वर्गीकरण
1. गंगा नदी प्रणाली से संबंधित नदियाँ
दामोदर, बराकर, कोनार, बोकारो, उसरी, अजय, मायूराक्षी, बांसलोई, गुमानी, उत्तर कोयल, औरंगा, पंचाने, चंदन आदि।
2. ब्राह्मणी नदी प्रणाली से संबंधित नदियाँ
शंख, दक्षिण कोयल, कारो आदि।
3. स्वर्णरेखा नदी प्रणाली
स्वर्णरेखा तथा उसकी सहायक नदियाँ — खरकई, करकरी, कांची।
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झारखण्ड की नदी प्रणाली राज्य की भौगोलिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक संरचना की आधारशिला है। दामोदर, स्वर्णरेखा, कोयल, शंख, अजय तथा मायूराक्षी जैसी नदियाँ कृषि, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन तथा जनजीवन से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। पठारी ढाल के कारण इनका प्रवाह तीव्र है और ये अनेक जलप्रपातों का निर्माण करती हैं। अतः झारखण्ड की नदियाँ केवल प्राकृतिक जलधाराएँ नहीं, बल्कि राज्य की जीवनरेखा हैं। इनके संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन तथा संतुलित उपयोग से ही राज्य का सतत विकास संभव है।
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