झारखण्ड की प्रमुख नदी घाटी एवं सिंचाई परियोजनाएँ | स्थापना वर्ष, उद्देश्य, क्षमता एवं पूर्ण विश्लेषण

झारखण्ड की प्रमुख नदी घाटी एवं सिंचाई परियोजनाएँ | स्थापना वर्ष, उद्देश्य, क्षमता एवं पूर्ण विश्लेषण

  

नदी घाटी परियोजनाएँ 

झारखण्ड जल संसाधनों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण राज्य है। यहाँ की स्थलाकृति प्रायः पठारी है तथा अधिकांश नदियाँ वर्षा आधारित हैं। राज्य की नदियों का प्रवाह मुख्यतः दक्षिण से उत्तर तथा पश्चिम से पूर्व की ओर होता है। वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण-पश्चिमी मानसून से प्राप्त होता है, जिसके कारण वर्षा ऋतु में नदियों में जल की प्रचुरता तथा ग्रीष्म ऋतु में जल की कमी देखी जाती है। इसी असमान वितरण को संतुलित करने के उद्देश्य से नदी घाटी परियोजनाओं का विकास किया गया। राज्य सरकार द्वारा बड़ी, मध्यम तथा लघु सिंचाई योजनाओं के माध्यम से जल संचयन, संरक्षण तथा वितरण की समन्वित व्यवस्था विकसित की गई है। इन योजनाओं का लक्ष्य कृषि उत्पादन में वृद्धि, बहुफसली प्रणाली को बढ़ावा, ग्रामीण आय में वृद्धि तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। झारखण्ड में लगभग 24.59 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई योग्य मानी गई है, जिनमें से लगभग 9.198 लाख हेक्टेयर भूमि के लिए सिंचाई क्षमता सृजित की जा चुकी है। यह कुल संभावित क्षेत्र का लगभग 37.40 प्रतिशत है। शेष क्षेत्र में सिंचाई विस्तार की व्यापक संभावनाएँ विद्यमान हैं।

नदी घाटी परियोजनाओं के प्रमुख उद्देश्य

• वर्षा जल का संचयन एवं संरक्षण
• सिंचित क्षेत्र का विस्तार
• बाढ़ नियंत्रण
• जलविद्युत उत्पादन
• मत्स्य पालन का विकास
• औद्योगिक इकाइयों हेतु जल उपलब्ध कराना
• पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना
• क्षेत्रीय आर्थिक असमानता को कम करना

1. सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना

सुवर्णरेखा नदी झारखण्ड की एक महत्वपूर्ण नदी है, जो आगे चलकर पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा से होकर बहती है। इस नदी पर बहुउद्देशीय परियोजना का विकास किया गया, जिसका प्रथम चरण 1982–83 में प्रारंभ हुआ तथा 2008 में पूर्ण हुआ।

यह एक अंतर्राज्यीय परियोजना है, जिसमें तीन राज्यों की सहभागिता है। इसका उद्देश्य सिंचाई विस्तार, विद्युत उत्पादन तथा क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है।

हुंडरू जलप्रपात से लगभग 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाता है।

प्रमुख संरचनाएँ

क्रमांक नदी संरचना उद्देश्य
1 खरकाई इचा बाँध जल संचयन
2 खरकाई खरकाई बैराज सिंचाई
3 सुवर्णरेखा चांडिल बाँध सिंचाई
4 सुवर्णरेखा गालूडीह बैराज जल वितरण

2. दामोदर घाटी परियोजना

दामोदर नदी को पूर्व में “बंगाल का शोक” कहा जाता था, क्योंकि यह नदी वर्षा ऋतु में भीषण बाढ़ लाती थी। बाढ़ नियंत्रण तथा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 1948 में दामोदर घाटी परियोजना का शुभारंभ किया गया। यह देश की प्रथम बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है।

इस परियोजना के अंतर्गत दामोदर तथा उसकी सहायक नदियों — बराकर और बोकारो — पर अनेक बाँधों का निर्माण किया गया। परियोजना का संचालन एक वैधानिक निकाय द्वारा किया जाता है।

परियोजना के प्रमुख उद्देश्य

• बाढ़ नियंत्रण
• सिंचाई सुविधा का विस्तार
• जलविद्युत उत्पादन
• औद्योगिक जलापूर्ति
• पर्यावरणीय संतुलन

सिंचाई एवं विद्युत

यह परियोजना लगभग 8 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है तथा लगभग 1200 मेगावाट विद्युत उत्पादन करती है। झारखण्ड एवं पश्चिम बंगाल के औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

दामोदर घाटी परियोजना के अंतर्गत बाँध

क्रमांक नदी बाँध उद्देश्य
1 बोकारो कोनार सिंचाई
2 बोकारो बोकारो सिंचाई
3 दामोदर बेरमो जल भंडारण
4 दामोदर अय्यार सिंचाई
5 दामोदर पंचेत बाढ़ नियंत्रण
6 बराकर बलपहाड़ी जल नियंत्रण
7 बराकर मैथन सिंचाई, विद्युत
8 बराकर तिलैया जल संचयन, विद्युत

3. उत्तर कोयल परियोजना

उत्तर कोयल नदी पर आधारित यह परियोजना पलामू एवं आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा का विस्तार करती है। इसका उद्देश्य वर्षा पर निर्भरता कम करना है।

4. अमानत सिंचाई परियोजना

अमानत नदी पर निर्मित यह परियोजना पलामू क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृषि उत्पादन को स्थिरता प्रदान करती है।

5. पुनासी जलाशय परियोजना

देवघर जिले में अजय नदी पर स्थित पुनासी जलाशय परियोजना सिंचाई के साथ-साथ जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे आसपास के क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता में वृद्धि हुई है।

6. अजय सिंचाई परियोजना

अजय नदी पर आधारित यह परियोजना देवघर क्षेत्र में कृषि उत्पादन को बढ़ाने में सहायक है। वर्षा आधारित कृषि को स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान करना इसका मुख्य उद्देश्य है।

7. गुमानी सिंचाई परियोजना

संथाल परगना क्षेत्र में स्थित गुमानी नदी पर आधारित यह परियोजना क्षेत्रीय कृषि विकास में सहायक सिद्ध हुई है। यह लघु एवं मध्यम स्तर की सिंचाई योजना है।

8. कोनार सिंचाई परियोजना

कोनार नदी पर निर्मित यह परियोजना हजारीबाग क्षेत्र में स्थित है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। यह दामोदर घाटी प्रणाली का भी एक महत्वपूर्ण घटक है।

9. ऊपरी शंख परियोजना

शंख नदी पर आधारित यह परियोजना दक्षिण-पश्चिमी झारखण्ड में सिंचाई विस्तार हेतु महत्वपूर्ण है।

10. बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर परियोजना

इस परियोजना के अंतर्गत गंगा नदी के जल को पंप के माध्यम से नहरों में प्रवाहित कर कृषि भूमि तक पहुँचाया जाता है। यह तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना है।

11. पंचखेड़ो जलाशय योजना

यह लघु सिंचाई योजना है, जो सीमित क्षेत्र में कृषि भूमि को जल उपलब्ध कराती है।

12. सोनुआ जलाशय योजना

पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र में स्थित यह योजना स्थानीय कृषि क्षेत्र की सिंचाई आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।

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झारखण्ड की प्रमुख नदी घाटी एवं सिंचाई परियोजनाएँ

क्रमांक परियोजना संबंधित नदी प्रमुख उद्देश्य विशेष तथ्य
1 सुवर्णरेखा परियोजना सुवर्णरेखा सिंचाई, विद्युत 1982–83 प्रारंभ
2 दामोदर घाटी परियोजना दामोदर तंत्र सिंचाई, विद्युत, बाढ़ नियंत्रण 8 लाख हे. सिंचाई, 1200 मेगावाट
3 उत्तर कोयल उत्तर कोयल सिंचाई वर्षा निर्भरता में कमी
4 अमानत अमानत सिंचाई पलामू क्षेत्र
5 पुनासी अजय सिंचाई जलाशय योजना
6 अजय अजय सिंचाई देवघर क्षेत्र
7 गुमानी गुमानी सिंचाई संथाल परगना
8 कोनार कोनार सिंचाई दामोदर तंत्र का भाग
9 ऊपरी शंख शंख सिंचाई दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र
10 बटेश्वरस्थान गंगा पंप आधारित सिंचाई तकनीकी परियोजना
11 पंचखेड़ो स्थानीय नदी लघु सिंचाई सीमित क्षेत्र
12 सोनुआ स्थानीय नदी सिंचाई पश्चिमी सिंहभूम


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